जो मुक्ति की भी परवा नही करते, उन भक्तो की में निरंतर वंदना करता हूँ; जो पद पद बढ़नेवाले आनंद स्त्रोत बहाती है और जिसका आश्रय लेकर भगत लोग सबके मुकुटमणि भगवान को अपने वशमें कर लेते है उन भक्तिकी ही में प्रतिदिन याचना करता हूँ और जिन्हें वह भक्ति अत्यन्त प्रिय है उन शरणागतवत्सल भगवान श्री हरिका में नित्य भजन करता हूँ।